किसी शायर की आँखों में देखो तो पता चले

किसी शायर की आँखों में देखो तो पता चले...

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किसी शायर की आँखों में देखो तो पता चले
तन्हा तन्हा ये दिन, तन्हा तन्हा ये रात है ।

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जन्म से ना तो कोई दोस्त पैदा होता है और ना ही दुश्मन,
वह तो हमारे घमंड, ताकत या व्यवहार से बनते है।

वक़्त आँखों से जब नींदे चुरा लेता है

वक़्त आँखों से जब नींदे चुरा लेता है,
दर्द आँखों में घरोंदा बना लेता है ।
ज़ख्म यादों के सिरहाने बैठ जाता है ,
माँ की गोद तन्हाई को बना लेता है।।

अभी उनकी मोहब्बत के कुछ निशान बाकी है

अभी उनकी मोहब्बत के कुछ निशान बाकी है,
नाम तो लब पर हैं पर जान बाकी हैं,
क्या हुआ अगर वो देख कर अपना मुंह फेर लेते है,
ये तसल्ली तो हैं की उनमे हमारी पहचान बाकी हैं!

ग़लती नीम की नहीं
कि वो कड़वा है‼
ख़ुदगर्ज़ी जीभ की है
जिसे मीठा पसंद है

ऐ सनम मैं तेरे लिए बदनाम हो जाऊं

ऐ सनम मैं तेरे लिए बदनाम हो जाऊं,
तू अपनी ओर खींचे वो लगाम हो जाऊं,
किसी और मंजिल की चाह नहीं मुझको,
सिर्फ तेरी ही गलियों में गुमनाम हो जाऊं..!!

याद करते हैं दोस्तों को

याद करते हैं दोस्तों को,
यादों से दिल भर आता है,
कभी साथ जीते थे सही,
आज मिलने को दिल तरस जाता है.