Sad Shayari

वो मोहब्बत भी तेरी थी वो नफ़रत भी तेरी थी

वो मोहब्बत भी तेरी थी, वो नफ़रत भी तेरी थी,
वो अपनाने और ठुकरानी की अदा भी तेरी थी,
मे अपनी वफ़ा का इंसाफ़ किस से माँगता?…
वो शहेर भी तेरा था, वो अदालत भी तेरी थी..!!

मुझे इश्क है बस तुमसे नाम बेवफा मत देना

मुझे इश्क है बस तुमसे नाम बेवफा मत देना,
गैर जान कर मुझे इल्जाम बेवजह मत देना,
जो दिया है तुमने वो दर्द हम सह लेंगे मगर,
किसी और को अपने प्यार की सजा मत देना।

रास्ते खुद ही तबाही के निकाले हमने

रास्ते खुद ही तबाही के निकाले हमने,
कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने,
हमें मालूम है क्या चीज़ है मोहब्बत यारो,
घर अपना जला कर किये हैं उजाले हमने।

हो जुदाई का सबब कुछ भी मगर

हो जुदाई का सबब कुछ भी मगर,
हम उसे अपनी खता कहते हैं,
वो तो साँसों में बसी है मेरे,
जाने क्यों लोग मुझसे जुदा कहते हैं।

रब किसी को किसी पर फ़िदा न करे

रब किसी को किसी पर फ़िदा न करे,
करे तो क़यामत तक जुदा न करे,
ये माना की कोई मरता नहीं जुदाई में,
लेकिन जी भी तो नहीं पाता तन्हाई में।

बरबाद कर देती है मोहब्बत

बरबाद कर देती है मोहब्बत,
हर मोहब्बत करने वाले को,
क्योंकि इश्क़ हार नही मानता,
और दिल बात नही मानता..!!