Love Shayari

मरहम चाहा तो दर्द साबित हुए

मरहम चाहा तो दर्द साबित हुए
इश्क़ में वो खुदगर्ज साबित हुए_

जो है जहां का
वहीं पे वो शाद रहेगा,
हो काँटों में क्यूँ न बे-शक
फूल तो वहीं पे आबाद रहेगा

- अजय दत्ता

काग़ज़ की कश्ती थी पानी का किनारा था
खेलने की मस्ती थी ये दिल भी आवारा था
कहाँ आ गये हम इस समझदारी के दलदल में
वो नादान बचपन भी कितना प्यारा था..

कोई रास्ता नही दुआ के सिवा

कोई रास्ता नही दुआ के सिवा,
कोई सुनता नही खुदा के सिवा,
मैने भी ज़िंदगी को करीब से देखा है मेरे दोस्त,
मुस्किल मे कोई साथ नही देता आँसू के सिवा

ओ सनम अब यूँ रूठकर न जाओ दूर हमसे,
कि अब आदत सी हो गई है तुम्हारी,
तुम जो न दिखो तो अब,
न सुबह होती न शाम होती हमारी…

मुझे रिश्तो की लम्बी कतारों से क्या मतलब...
कोई दिल से हो मेरा तो एक शख्स ही काफी है ।